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Communestories Open Mic

Watch Full on Video on Instagram एक सफ़र था तेरे साथ जो खूबसूरत था, तूने जब tinder पे right swipe किया तो ऐसा लगा कि भरे बाज़ार में तूने हल्का सा मुझे छेड़ दिया,  मैने मेरी bio में नोट not for hook ups लिखा था, शायद तूने उसे मज़ाक में ले लिया था।   और तेरी bio में तूने जो लिखा था उससे तो तू अलग ही था,  Coffee के लिए तेरा पूछा गया सवाल  google से best pick up line था,  तू जैसा भी था, तेरे साथ सफ़र बड़ा खूबसूरत था।  पहेली मुलाकात में तूने कुछ ज्यादा ही इंतज़ार करवाया था,  क्युकी तू मेरे लिए मेरे पसंदीदा फूल जो ढूंढने गया था।  तुझे देखने की ऐसी तलब थी की २७ बार तुझे insta पे stalk किया था।  सफेद शर्ट, ब्लू जींस, लाइट शेव्ड,  बिना hint दिए तू ऐसे ही आया जैसा मैने सोचा था,  और मैने भी बिंदी लगाके तुझे अपनी जाल में फंसाया था।  तभी लगा था,  ये जोड़ी तो रब ने बना दी । हा,  तेरे साथ वो सफ़र बड़ा खूबसूरत था।  बचपन से bollywood देखकर जो प्यार करना सीखा था, वो मानो एकसाथ तुजपे आजम...

Magic_mic's Open Mic

Watch Full Video on Instagram किसने पूछा, अगर तू ये दुनिया बनाती तो कैसी होती,  मैने कहा,  में हर एक को कुछ भी चुनने की आज़ादी देती, काफी लड़के की पसंद गुलाबी होती, क्लीन शेवड लड़के को में स्डट और माचो बुलाती, घर के पहेले चिराग को जो चाहे बनने देती, में किसी लड़के को दिल टूटने पर रोने देती, किसी बच्चे को गुड़िया से खेलने से रोकती नहीं, उसको कीसिसे डर लगे तो उसके ऊपर हसती नहीं। किसने पूछा, अगर तू ये दुनिया बनाती तो कैसी होती,  मैने कहा,  में हर एक को कुछ भी चुनने की आज़ादी देती, कोई लड़का ससुराल जा के रहे तो उसे घर जमाई ना कहेती, अगर उसे सिर्फ लड़के पसंद है तो उसे गे का टैग ना देती, कोई लड़का खुले आम प्यार का इज़हार करे तो तमाशा नहीं बनाती, उसको पापा बनने की खुशी में २ महीना छुट्टी दे देती,  किसने पूछा, अगर तू ये दुनिया बनाती तो कैसी होती,  मैने कहा,  में हर एक को कुछ भी चुनने की आज़ादी देती, कोई लड़की को रोना ना आए तो उसे ठित ना कहती, उसको जिम जा के फिगर बनाना जरूरी नहीं होता, उसको आई ब्रोस वैक्सिंग क...

Tale Poetry's Open Mic

Watch Full Video on Instagram मुझे खुद से नहीं, तुझसे आज़ाद किया जाए, वो खामोशियां ढूंढ ले, वो सन्नाटे खोज ले, कुछ बेचेनिया जगा दे, कुछ रिश्ते जला दे, क्यों ना आज उनको बुझा दिया जाए, चल आज, मुझे खुद से नहीं, तुझसे आज़ाद किया जाए।  जो अल्फ़ाज़ थम से गए, जो निगाहें झुक सी गई, जो आंसू सुख से गए, और दिल उलझ सा गया, क्यों ना उनको सुलझा लिया जाए, चल आज, मुझे खुद से नहीं, तुझसे आज़ाद किया जाए।  किस्से कहानियों सा इश्क़ था, रुतबा मैने भी तेरा रखा था, ख्वाहिशों का सितारा को चुना था, सपनों में सिर्फ तुमको बुना था, ना कड़वी कहूं, ना मीठी,  क्यों ना उन यादों को मिटा दिया जाए,  मुझे खुद से नहीं, तुझसे आज़ाद किया जाए।  तेरा देर से आना मंज़ूर था, तेरा गुस्सा होना कुबूल था, वो कैफे का सोफ़ा जैसे घर था, जहापे तूने दिल चुराया था, ना चाय का था ना कोफी सा क्यों ना इस चस्के को छोड़ दिया जाए, मुझे खुद से नहीं, तुझसे आज़ाद किया जाए।  वो पहेली नजर सा इश्क़ था, जो मेरे से भी...